Vatsalya Ras (वात्सल्य रस) - Hindi Grammar

Vatsalya Ras (वात्सल्य रस)

इसका स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है।

उदाहरण:

Vatsalya Ras ke Udaharan

1.
बाल दसा सुख निरखि जसोदा, पुनि पुनि नन्द बुलवाति
अंचरा-तर लै ढ़ाकी सूर, प्रभु कौ दूध पियावति
2.
सन्देश देवकी सों कहिए
हौं तो धाम तिहारे सुत कि कृपा करत ही रहियो
तुक तौ टेव जानि तिहि है हौ तऊ, मोहि कहि आवै
प्रात उठत मेरे लाल लडैतहि माखन रोटी भावै
Vatsalya Ras

रस के प्रकार/भेद

क्रम रस का प्रकार स्थायी भाव
1 श्रृंगार रस रति
2 हास्य रस हास
3 करुण रस शोक
4 रौद्र रस क्रोध
5 वीर रस उत्साह
6 भयानक रस भय
7 वीभत्स रस जुगुप्सा
8 अद्भुत रस विस्मय
9 शांत रस निर्वेद
10 वात्सल्य रस वत्सलता
11 भक्ति रस अनुराग

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